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Real Story of Anant Singh: अनंत सिंह के राजनीतिक सफर में साल 2025 एक बार फिर ऐतिहासिक साबित हुआ। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा में जन सुराज समर्थक दुलारचंद यादव की हत्या हो गई थी। इस मामले में अनंत सिंह पर आरोप लगे और पुलिस ने 1 नवंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इसके बावजूद उन्होंने जेल से ही JDU के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। 14 नवंबर 2025 को घोषित नतीजों में अनंत सिंह ने 28,206 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। यह उनकी मोकामा से लगातार छठी जीत थी।
इस जीत ने एक बार फिर साबित किया कि जेल में रहने के बावजूद मोकामा में उनकी चुनावी पकड़ मजबूत बनी हुई थी। हालांकि, चुनावी जीत के साथ ही दुलारचंद यादव हत्याकांड उनके लिए एक बड़ी कानूनी चुनौती बन गया।
दुलारचंद यादव हत्याकांड ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा की राजनीति को काफी प्रभावित किया था। 30 अक्टूबर 2025 को चुनाव प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या हो गई थी। वह जन सुराज पार्टी से जुड़े समर्थक थे और चुनावी गतिविधियों में सक्रिय थे।
इस मामले में अनंत सिंह और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए गए। पुलिस ने 1 नवंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार किया था। इसके बाद वह जेल से ही विधानसभा चुनाव में उतरे और जीत हासिल की।
19 मार्च 2026 को पटना हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में जमानत दे दी थी। लेकिन दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के जमानत आदेश को रद्द कर दिया और अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का निर्देश दिया। अदालत ने बिहार पुलिस को चार महीने के भीतर जांच पूरी करने का भी निर्देश दिया है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि यह मामला अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। अनंत सिंह पर लगे आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
अनंत सिंह और JDU के बीच विवाद की एक बड़ी वजह बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट का चुनाव बना। इस सीट पर JDU ने अपने वरिष्ठ नेता नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था।
लेकिन अनंत सिंह ने पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया। उन्होंने खुले तौर पर नीरज कुमार को हराने की बात भी कही थी।
23 अक्टूबर 2026 को विधान परिषद चुनाव के लिए मतदान हुआ। इस दौरान मोकामा क्षेत्र में अनंत सिंह और नीरज कुमार के समर्थकों के बीच तनाव और झड़प की खबरें भी सामने आईं।
इसके बाद 24 अक्टूबर 2026 को JDU ने बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा के आदेश से अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।
पार्टी ने अनंत सिंह पर पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करने, शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने और दूसरे दल के उम्मीदवार का प्रचार करने जैसे आरोप लगाए।
JDU से निष्कासन के बाद अनंत सिंह के सामने एक और राजनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। पार्टी ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता पर कार्रवाई करने की मांग की है।
इसका मतलब है कि पार्टी ने दलबदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। हालांकि, केवल पार्टी से निष्कासित होने से विधायक की सदस्यता अपने आप समाप्त नहीं होती। इस संबंध में अंतिम फैसला विधानसभा अध्यक्ष को करना है।
अगर उनकी सदस्यता समाप्त होती है, तो मोकामा विधानसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में विधानसभा अध्यक्ष इस मामले में क्या फैसला लेते हैं।

अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी JDU ने छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है।
इसके अलावा नीलम देवी को राज्य स्तरीय 20 सूत्री कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति से भी हटा दिया गया। इसी समिति की सदस्यता के आधार पर उन्हें पटना में सरकारी आवास आवंटित किया गया था।

26 अक्टूबर 2026 को जारी सरकारी आदेश के मुताबिक, उन्हें 25 नवंबर 2026 तक सरकारी बंगला खाली करने के लिए कहा गया।
इस तरह JDU की कार्रवाई का असर अनंत सिंह के साथ-साथ उनके परिवार की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति पर भी पड़ा है।
30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद अनंत सिंह की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अदालत ने उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
इस फैसले के बाद अनंत सिंह ने कहा कि वह अदालत के आदेश का पालन करेंगे। साथ ही उन्होंने JDU नेता नीरज कुमार पर उन्हें मामले में फंसाने की साजिश रचने का आरोप भी लगाया। हालांकि, नीरज कुमार ने इन आरोपों से इनकार किया है।
अब अनंत सिंह के सामने एक साथ कई चुनौतियां हैं। एक तरफ JDU से छह साल का निष्कासन, दूसरी तरफ विधानसभा सदस्यता पर संभावित कार्रवाई और तीसरी तरफ दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का आदेश।
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अनंत सिंह अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए रख पाएंगे या फिर उनके परिवार के दूसरे सदस्य मोकामा की राजनीति में आगे की भूमिका निभाएंगे।
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