BBAU, Lucknow: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के एसईईएस कान्फ्रेंस हॉल में इंडिया टुडे ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में डिजिटल धोखाधड़ी जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह सत्र डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों और धोखाधड़ी से निपटने के लिए जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने ऑनलाइन माध्यम से की। विशिष्ट अतिथि, प्रो. के.के. पाण्डेय, तीर्थांकर महावीर विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक आईक्यूएसी रहे। मुख्यवक्ता इंडिया टुडे ग्रुप के फेक्ट चैक विभाग के एडिटर बालकृष्णन, एवं फेक्ट चैक टीम की संजना सक्सेना, अविनाश सिंह, रमन यादव, कंटेंट क्रिएटर इत्यादि मौजूद रहे।
डिजिटल साक्षरता के महत्व पर जोर : कुलपति राजकुमार मित्तल
कुलपति प्रोफेसर राजकुमार मित्तल ने अपने उद्घाटन भाषण में सार्वजनिक क्षेत्र के विभिन्न विभागों में डिजिटलीकरण और इसके साथ जुड़े जोखिमों, विशेष रूप से यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान प्रणालियों में होने वाली धोखाधड़ी पर प्रकाश डाला। उन्होंने डिजिटल साक्षरता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह समय की मांग है कि इस क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित शोध की अत्यधिक आवश्यकता है, जिससे तकनीकी नवाचारों को सामाजिक और आर्थिक विकास से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सके।

भावनात्मक कहानियों का सहारा लेते हैं स्कैमर : डॉ. कृष्ण कुमार पांडे
विशिष्ट अतिथि, डॉ. कृष्ण कुमार पांडे, जो चार दशकों से अधिक समय से शिक्षा और उद्योग में एक दूरदर्शी अकदमीशियन के रूप में कार्यरत हैं, उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि स्कैमर अक्सर भावनात्मक कहानियों का सहारा लेते हैं, जैसे किसी प्रियजन की दुखद स्थिति का जिक्र कर पैसे की मांग करना। उन्होंने विभिन्न प्रकार के स्कैम, जैसे फोन कॉल स्कैम और सोशल इंजीनियरिंग, के बारे में जागरूकता बढ़ाई और इनसे बचने के लिए सतर्क रहने की सलाह दी।
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फैक्ट चेक टीम के प्रमुख ने डिजिटल धोखाधड़ी पर छात्रों को चेताया
इंडिया टुडे ग्रुप की फैक्ट चेक टीम के प्रमुख और मुख्य संपादक बालकृष्ण ने एक इंटरैक्टिव सत्र का संचालन किया। 20 वर्षों से अधिक के प्रसारण पत्रकारिता के अनुभव के साथ, बालकृष्ण ने डिजिटल धोखाधड़ी के विभिन्न प्रकारों, जैसे फिशिंग, ऑनलाइन स्कैम, और डेटा उल्लंघन, के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने पीड़ितों की वास्तविक कहानियों और अनुभवों को साझा किया, साथ ही ऐसी वेबसाइटों की जानकारी दी जिनके माध्यम से व्यक्ति यह जांच सकते हैं कि उनका डेटा कितनी बार उल्लंघन का शिकार हुआ है। उन्होंने धोखाधड़ी से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम भी सुझाए, जैसे मजबूत पासवर्ड का उपयोग और संदिग्ध लिंक से बचना।

फैक्ट चैंपियंस क्विज़ का आयोजन
सत्र के अंत में, एक रोचक फैक्ट चैंपियंस क्विज़ का आयोजन किया गया, जिसमें शीर्ष पांच विजेताओं, अर्शिया (प्रथम स्थान), विशाल भौमिक, अर्पित सिंह, डॉ. अभिषेक वर्मा, और जय को इंडिया टुडे के विशेष उपहारों से सम्मानित किया गया।
कार्यशाला का समापन विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर और समन्वयक प्रो. एमपी सिंह ने किया। उन्होंने डिजिटलीकरण के बाद, विशेष रूप से 2020 के बाद से डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में तेजी से वृद्धि पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इस कार्यशाला को डिजिटल साक्षरता और जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। बीबीएयू और इंडिया टुडे ग्रुप की यह संयुक्त पहल डिजिटल धोखाधड़ी के खिलाफ जागरूकता फैलाने में एक मील का पत्थर साबित होगी।
अंत में मंचासीन अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही प्रो. एम.पी. सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। समस्त कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।

11 हज़ार करोड़ रूपए की डिजिटल धोखाधड़ी
साइबर अपराध कितनी जटिल समस्या है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत इंडियन साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर (I4C) के अनुसार जनवरी 2024 से जून 2024 तक 11,269 करोड़ रूपए की डिजिटल धोखाधड़ी हुई। इतना ही नहीं I4C ने ये भी अनुमान लगाया है कि 2025 में 1.2 लाख करोड़ रूपए का cyber fraud होने की संभावना है जो कि भारत के GDP को 0.7% नुकसान पहुंचाएगा।
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