UP School Merger Issue: उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा विभाग ने 16 जून 2024 को एक आदेश दिया है जिसमें कहा गया है कि जिन प्राथमिक स्कूलों में बहुत कम बच्चे हैं, उन्हें पास के बड़े स्कूलों में मिला दिया जाएगा। यहां कम बच्चों से अर्थ 50 या उससे कम छात्रों से है।
साथ ही 150 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों और 100 से कम छात्रों वाले उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापक के पदों को समाप्त कर दिया जाएगा। ऐसे 5000 स्कूल बंद होने वाले हैं। सरकार का कहना है कि इससे शिक्षा के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा, स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ेगी और खर्च कम होगा।
छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा
छात्रों और अभिभावकों में गुस्सा और निराशा भी है। उनका कहना है कि छोटे बच्चों को अब स्कूल जाने के लिए ज़्यादा दूर जाना पड़ेगा, जिससे उन्हें परेशानी होगी। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा, स्कूल तक पहुंच और पढ़ाई में रुकावट जैसे मुद्दे उठाते हुए सरकार से इस फैसले को रोकने की मांग की है।
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
कुछ छात्रों ने अपने अभिभावकों के माध्यम से स्कूलों के विलय को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 7 जुलाई को उनकी रिट याचिकाएं खारिज कर दीं, यह कहते हुए कि स्कूलों का विलय संविधान के article 21A का उल्लंघन नहीं करता है।
उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने दिया था धरना
दूसरी ओर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी राज्य सरकार की स्कूल विलय नीति की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि 50 से कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद करने का फैसला ग्रामीण बच्चों के लिए शिक्षा को मुश्किल ना देगा।
अपनी मांगों को लेकर संघ ने 8 जुलाई को अपने जिले के बेसिक शिक्षा कार्यालय के बाहर धरना दिया।
संघ के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों को मिलाकर या जोड़कर 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और जरूरी शिक्षा से दूर कर रही है। प्रधानाध्यापकों को हटाने के निर्णय पर उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता बंद हो जाएगा।
शर्मा ने कहा कि स्कूलों के बंद होने से हजारों रसोइयों की नौकरी चली जाएगी और जो लोग D.El.Ed या BTC की पढ़ाई करके शिक्षक बनने का सपना देख रहे है उन्हें नौकरी नहीं मिल पाएगा ।
उन्होंने यह मांग भी दोहराई कि सरकार स्कूल विलय का फैसला वापस ले। उनका कहना है कि कोई भी स्कूल बंद नहीं होना चाहिए। अगर सरकार सच में शिक्षा को बेहतर बनाना चाहती है तो हर कक्षा में एक सहायक शिक्षक और हर स्कूल में एक प्रधानाचार्य होना चाहिए।
वहीं, राज्य सरकार ने इन बातों को खारिज कर दिया है। सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि हम राज्य के स्कूलों मे Right to free and compulsory education act (RTE 2009) के तहत शिक्षकों का सही तरीके से समायोजन कर रहे हैं।
10 साल में यूपी के 25 हज़ार स्कूल बंद हुए
एक आंकड़ा ये भी है कि 2014-15 से 2023-24 तक देश भर में 89,441 स्कूल बंद हो गए जिनमें अकेले यूपी के 25,126 स्कूल बंद हुए हैं, मतलब हर चौथ बंद होने वाला स्कूल यूपी से था। इन दस वर्षों में जहां सरकारी स्कूलों की संख्या में 8% गिरावट हुई तो वहीं प्राइवेट स्कूलों में लगभग 15% वृद्धि हुई है।
उत्तर प्रदेश में पिछले कई सालों से शिक्षक भर्ती आई ही नहीं है। करीब 2 लाख शिक्षक पद खाली पड़े हैं। स्कूलों का इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐसा है कि कहीं छत टपकती है तो कहीं दिवार ही नहीं है। कहीं बच्चे तो हैं लेकिन शिक्षक नहीं। मिड-डे मील के खाने में गुणवत्ता नहीं। इन सब समस्याओं का एक झटके में इलाज मिल गया – स्कूल ही बंद कर दो। गरीब के बच्चों को पढ़ने की ज़रूरत क्या है? मजदूरी करे। योगी आदित्यनाथ के कोई बच्चे नहीं हैं और जिन अधिकारियों ने ये शानदार नीति बनाई है उनके बच्चे महंगे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। इसीलिए कहा जाता है कि bureaucracy अपनेआप में एक जाति है जिसके पास सारे अधिकार हैं, जो सभी निर्णय भी लेती है।
Also Read :- RailOne App : क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं?