Child Marriage: राज्य – राजस्थान, जिला – करौली, मामला – बाल विवाह, गरीब, बेरोज़गार बाप, रूपयों की कमी, 4 बेटीयां, स्कूल, पढ़ाई, प्रतिदिन के खर्चे समाधान – शादी, एक ही दिन, एक ही साथ बड़ी बेटी की उम्र 17 वर्ष, दूसरी 15 वर्ष, तिसरी 14 और चौथी १३ ये है आधुनिक भारत, विश्वगुरु भारत, नया भारत, विश्व की सबसे तेज उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक, GDP, trillion dollars, purchasing power parity, और जोड़ लिजिए जितने भी आप शब्दों से सुशोभित करना चाहें।
राजस्थान के उसी करौली जिले में 33.5% महिलाओं की शादी 18 की उम्र से पहले कर दी जाती है। ये तो एक मामला आया है सामने क्योंकि दूसरे नंबर की, 15 साल की बेटी ने जोर लगा दिया कि रूक जाए शादी और सफल भी हो गई। ज़ोर तो बहुत सारी लड़कियां लगाती होंगी न। नहीं सफल हो पाती। इसने तो पहले अपने शिक्षकों से मदद मांगी। शिक्षक भी हिचक रहे थे सीधे तौर पर सामने आकर मामले को हाथ में लेने में। तो फिर बच्ची को एक NGO के पास भेजा जो कुछ दिन पहले ही स्कूल में awareness फैलाने आए थे। बच्ची ने call किया। ग्रामराज्य विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान नाम के इस NGO ने कहा कि office आ जाओ। बच्ची अपनी एक दोस्त के साथ छिपते-छिपाते पहुंच गई NGO के दफ्तर शादी की तय तिथि से लगभग एक सप्ताह पहले। वहां जाकर बच्ची को मिला आश्वासन कि चिंता मत करो, मदद मिलेगी, शादी नहीं होने देंगे। और जब तक मामला निपट नहीं जाता, किसी को कुछ पता भी नहीं चलने देंगे।
संस्थान के director छैल बिहारी शर्मा के अनुसार ये आश्वासन सुनकर लड़की के मुख पर सुकून की जो आभा थी वो अवर्णनीय है।
ग्रामराज्य विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान जो है ये Just Rights For Children Alliance के साथ मिलकर करौली जिले में बच्चों के अधिकारों की रक्षा हेतु कार्य करती है। हाल ही में इन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट से दिशानिर्देश हासिल कर लिया कि भैया अगर कोई बाल विवाह होते पाया गया तो उस गांव के प्रधान जिम्मेदार होंगे।
तो संस्थान के सदस्य child line अधिकारियों सहित बच्चों के माता-पिता से मिले। माता-पिता ने सीधा अस्वीकार कर दिया कि नहीं हमारी प्यारी, लाडली बेटीयां। हमने इनको इस लिए थोड़ी पैदा किया है कि बस शादी करके विदा कर दें। पढ़ाएंगे, लिखाएंगे, काबिल बनाएंगे। गरीब हैं तो क्या, जितना बन पड़ेगा, करेंगे।
अब ये सब मैं अपने से बनाकर बोल रहा हूं। बात सीधी ये है कि उन्होंने मना कर दिया कि कोई शादी नहीं हो रही।
फिर बेटीयों ने दिखाया साहस और बोलीं, नहीं शादी तो हो रही है और अगले सप्ताह से पहले ही हम सबकी शादी एक साथ, एक ही दिन, एक ही मंडप में हो जाएगी।’
फिर counselling की गई पिता जी की। समझाया गया बाल विवाह के कानूनी परिणाम क्या हो सकते हैं, सामाजिक परिणाम क्या हो सकते हैं। थोड़ा धमकाया गया होगा, डराया गया होगा, कुछ बात प्रेम से भी समझाई गई होगी। मान गए बापू जी। लिखित में दिया कि नहीं करूंगा शादी बालिक होने से पहले। पढ़ाऊंगा बच्चियों को। संस्थान ने भी नौकरी लगवाने का वादा दिया। सुनने में आ रहा है कि नौकरी लग भी गई है।
बात केवल बाल विवाह की नहीं है। बात ये है कि पैदा ही क्यों किया 4 लड़कियां? प्रेम तो था नहीं। प्रेम होता तो 13 साल, 14 साल, 15,17 – इतनी छोटी उम्र में शादी कर देते क्या? अरे रूपए नहीं थे तो कोई और उपाय ढूंढते न,शादी थोड़ी न कर देते। सोचिए कि चारों कि शादी एक साथ कर रहे हैं महानुभाव, यानि जल्दबाजी में हो रही है शादी। तो quality क्या होगी ऐसी शादी की? कैसा परिवार, कैसे लड़के? उन बच्चियों का पूरा जीवन अभी पड़ा है और वो बिल्कुल खराब या नष्ट होते-होते बच गया। तो प्रेम तो था नहीं। तो पैदा क्यों किया? बेटा चाहिए था। बेटा चाहिए था। और बेटा क्यों चाहिए। बेटे से प्यार है? नहीं।
आज मैं 20 या 25 का हूं। तो जब मैं 80 का हो जाऊंगा तो मेरी टट्टी साफ़ करने वाला एक नौकर चाहिए। सबसे भरोसेमंद नौकर तो वही होगा जो मेरे शरीर से ही निकले। तो प्यार तो हम न बेटे से करते हैं, न बेटी से। हम स्वार्थी हैं अपने अलावा किसी की नहीं सोचते।
दावा हम सभी का होता है प्रेम का लेकिन जीवन खत्म हो जाता है।
खैर, वापस आते हैं। कुछ आंकड़े बता देता हूं child marriages पर। पूरे देश में 20 से 24 वर्ष की 23.3% महीलाओं की शादी 18 की उम्र से पहले कर दी गई। राजस्थान के गांवों लिए ये आंकड़ा 28.3% है और शहरों के लिए 15.1% है।
पुरूषों की बात करें तो पूरे देश में 25 से 29 वर्ष की आयु के 17.7% पुरुषों की शादी 18 की उम्र से पहले कर दी गई। वो 8 राज्य जिनमें बाल विवाह का दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है, उनके नाम हैं – Andhra Pradesh, Assam, Bihar, Jharkhand, Rajasthan, Telangana, Tripura और पश्चिम बंगाल। ये सारा डेटा हमने लिया है NFHS-5 यानि National Family Health Survey-5 से।
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