Japan Population: एक समय था जब आपको देशहित के लिए विज्ञान, कला, खेल या फ़ौज में भत द्वारा देश सेवा करनी पड़ती थी लेकिन आधुनिक दौर में अब वह काम आप बिस्तर पर लेटे-लेटे कर सकते हैं। आप बिस्तर पर जितना अधिक समय देंगे उतना ही देश समृद्ध होगा। अब से बिस्तर ही आपका रण क्षेत्र, प्रयोगशाला या खेल का मैदान होगा। इसी बिस्तर से आप देश की जनसंख्या बढ़ाकर उसे कृताथ करेंगे। जैसा कि कई सारे भारतीय वषfi से करते आ रहे हैं।
हाल ही में जापान के टोक्यो शहर में हफ़्ते में चार दिवसीय काय सप्ताह को अप्रैल से लागू करने की बात चचा में है। जापान के लगातार fगरते हुए प्रजनन दर को देखते हुए नीfत निधारकों ने फ़ैसला किया है कि आगे से हफ़्ते में तीन दिन का अवकाश रखा जाएगा। जिससे परिवार बढ़ाने के लिए अfधक समय fमल सके। लगता है नीfत निधारकों को भी पता है कि अगर एक दिन का अfत रक्त अवकाश प्रदान fकया गया तो उसे आप बिस्तर पर ही बिताना पसंद करेंगे।
आहार, निद्रा और मैथुन जैसी मूलभूत मानवीय आवश्यकताओं से नीति निधा रक भलीभांति पर्चित हैं, इसी लिए चार दिन तक कार्य करके आहार का इंतज़ाम हो जाने के बाद हफ़्ते के शेष तीन दिनों में भरपूर निद्रा और मैथुन का अवसर प्रदान दिया जायेगा ताfक देश आगे बढ़ता रहे। जैसा कि भारतीयों ने देश को आगे बढ़ाते-बढ़ाते आज भारत को fवश्व गुरु बना दिया है।
जापान में प्रजनन दर 1.26 है जबfक किसी भी देश की जनसंख्या को बनाए रखने के लिए प्रजनन दर 2.1 की आवश्यकता होती है। घटता हुआ प्रजनन दर केवल जापान के fलए ही नहीं बिल्क चीन, सिंगापुर जैसे अन्य देशों के fलए भी चिन्ता का विषय बन चुका है। जो चिन्ता का विषय नहीं है वह है पैदा हो रहे बच्चों का जीवन। फ़िलहाल भारत इस तरह की सभी fचंताओं से मुक्त है।
आज जब हमारे सामने जलवायु परिवर्तन, घटते रोज़गार के अवसर और आfथ क असमानता जैसी बड़ी चुनौतियाँ हैं, ऐसे में क्या बच्चे के ग रमापूण जीवन के बारे सोचा जाना अfनवाय नहीं है? या बच्चे पैदा करना बस फैक्ट्री के लिए एक और वर्कर की सप्लाई करना मात्र रह गया है। भारत में यह संख्या इतनी अfधक है fक अब फैक्ट्री में भी जगह नहीं है, इसलिए इन्हें अस्थाई रूप से कोfचंग संस्थानों में डाल दिया गया है और बाकी के बचे हुए सड़क पर धरने, रैली, रक्शा और ठेले के काम आ रहे हैं।
क्या वज़ह है घटते जन्मदर की?
आविवाहित लोग:- अधिकतर बच्चे विवाह के बाद ही पैदा होते हैं, विवाह से हटकर बच्चे का होना एक विरल घटना है। 2020 में, जापान में 50 वष की आयु में 28.3% पुरुष और 17.8% मfहलाएँ आविवाहित थीं। 1995 के बाद से इसमें वृद्धि ही हुई है। 2023 में, विवाह की संख्या 1930 के बाद से पहली बार 500,000 से नीचे दज की गई। जापान में इस समस्या से निपटने के fलए नीति निर्धारकों द्वारा डेटिंग ऐप लॉन्च करने की घोषणा हुई है। यह ऐप आपको मनचाहे साथी को तलाशने में मदद करेगा ताकि आप जल्द से जल्द देश की सेवा में तत्पर हो सके। भारत में ऐसे डेटिंग ऐप का इस्तेमाल सस्ते सेक्स तलाशने के काम आता है और विवाह के fलए पापा, चाचा, ताऊ, फूफा उपयोग में लाए जाते हैं।
श्रम विभाजन:- घर के काम और बच्चे को दूध पिलाना और पोतड़ा बदलना अधिकतर मfहलाओं के जिम्मे होता है जबकि पुरुष इन कामों में कम ही बंधा होता है। 2009 में, जापान में एक कामकाजी मfहला हर हफ़्ते 20 से 35 घण्टे का घरेलू काम करती थी जबकि पुरुष अधिकतम 5 घण्टे का काम करता था। यह प्रथा आज भी वैसे ही चली आ रही है। जापान में इस समस्या से निपटने के लिए डे केयर सेन्टर और पैटfन टी लीव का प्रबन्ध किया गया है पर भारत में ऐसे प्रबन्ध की कोई जरूरत नहीं होती क्योंfक यहां बच्चे भगवान भरोसे पाले जाते हैं।
असुरक्षित रोज़गार:- आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस, मशीनीकरण और रोबोटिक्स की वजह से रोज़गार के अवसर आज कम हुए हैं। आज जापान में बड़ी संख्या में बहुत सारे युवा अस्थाई रोज़गार द्वारा जीवनयापन कर रहे हैं जो कि उनकी विवाह की सम्भावना को बुरी तरह प्रभाfवत करता है।
इस समस्या से निपटने के लिए उनकी आमदनी का निरीक्षण कर उन्हें योजना अनुसार चाइल्ड अलाउंस दिया जाएगा।
लेfकन भारत में बेरोजगार युवा भी बड़ी आसानी से लाखों का दहेज़ लेकर विवाह कर सकता हैं, रोज़गार होने या न होने से उसकी पात्रता पर कोई अन्तर नही पड़ता।