23 अगस्त को जब पूरा देश राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस माना रहा था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों की मेहनत की तारीफ़ करते हुए उन्हें देश का गर्व बताया, उसी दिन हिमाचल प्रदेश में बीजेपी सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री Anurag Thakur ने बच्चों को संबोधित करते हुए एक ऐसा बयान दिया जिसने सबको हैरान कर दिया।
हनुमान जी पहले अंतरिक्ष यात्री थे
हिमाचल के एक पीएम श्री स्कूल में बच्चों से बातचीत करते हुए Anurag Thakur ने पूछा – पहला इंसान अंतरिक्ष में कौन गया था? बच्चे एक स्वर में बोले –नील आर्मस्ट्रांग। अब यहाँ उम्मीद थी कि वे बच्चों को सही जानकारी देंगे और बताएंगे कि वास्तव में पहले अंतरिक्ष यात्री सोवियत संघ के यूरी गागरिन थे। लेकिन Anurag Thakur ने कहा – “मुझे तो लगता है कि हनुमान जी पहले अंतरिक्ष यात्री थे।” उन्होंने आगे यह भी कहा कि हमें केवल किताबों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी परंपराओं और प्राचीन ज्ञान को समझना चाहिए। उन्होंने यह वीडियो खुद भी सोशल मीडिया पर साझा किया।
परंपराओं और प्राचीन ज्ञान के नाम पर अंधविश्वास
बात तो Anurag Thakur ने सही कही कि हमें अपनी परंपराओं और प्राचीन ज्ञान को समझना चाहिए। लेकिन ये समझाने का ठेका Anurag Thakur के पास नहीं होना चाहिए। क्योंकि साफ़ तौर पर वो परंपराओं और प्राचीन ज्ञान को समझा तो नहीं पा रहे हैं लेकिन देश का भविष्य ज़रूर बिगाड़ रहे हैं। साथ ही साथ अंधविश्वास फैला रहे हैं, हमारे धार्मिक देवताओं का अपमान कर रहे हैं।
हनुमान – चेतना जो राम को समर्पित
हनुमान जी का आम भारतीय के लिए क्या महत्व है ये बताने की आवश्यकता नहीं है। बच्चे-बच्चे को हनुमान चालीसा याद होती है। जब हम हनुमान जी को याद करते हैं तो आशय होता है ऐसी चेतना से जो मात्र राम को समर्पित है, जो अडिग है, अचल है, एकनिष्ठ है, प्रेमपूर्ण है, जो संपूर्ण वेदों का ज्ञाता है, जिसके हृदय में राम और सीता के अलावा कोई नहीं। ऐसी आस्था के प्रतीक के साथ खिलवाड़ किया है Anurag Thakur ने। और तो और सवाल ये है कि क्या इस तरह के बयान बच्चों को सही रास्ते पर ले जाएंगे? क्या अब हमारी शिक्षा व्यवस्था ऐसे भ्रामक और अंधविश्वास से भरी कहानियों से चलेंगी? क्या आने वाले समय में बच्चों को ये पढ़ाया जाएगा कि पहला अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग या यूरी गागरिन नहीं, बल्कि हनुमान जी थे?
धार्मिक कहानियों से जबरदस्ती विज्ञान निकालने की होड़
धार्मिक कहानियां निश्चित तौर पर बहुत महत्व रखती हैं। ये कहानियां ही एक मानवीय समाज का निर्माण करती हैं। लेकिन इन कहानियों में से जबरदस्ती विज्ञान निकालने की जो होड़ मची है ये विश्वगुरु बनने के लक्षण तो नही हैं। अगर वाकई Anurag Thakur मानते हैं कि उनके भ्रामक कथन में विज्ञान छिपा है, तो उन्हें इसे साबित करना चाहिए। विज्ञान में हर खोज तथ्य और तर्क से साबित की जाती है। अगर उनके पास कोई प्रमाण है, तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर, जैसे संयुक्त राष्ट्र में जाकर दुनिया को बताना चाहिए। लेकिन बच्चों के सामने इस तरह के बयान देना उन्हें गुमराह करने जैसा है।
सोचने वाली बात ये भी है कि जो नेता बच्चों को परंपराओं के नाम पर ऐसे ज्ञान दे रहे हैं वो अपने ही बच्चों को विदेश में पढ़ने भेजते हैं। वहाँ उनके बच्चे आधुनिक विज्ञान ही पढ़ते हैं, अंधविश्वास नहीं। यह सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि एक बड़ा सवाल है – हम अपने बच्चों को किस दिशा में ले जा रहे हैं? क्या हम उन्हें तर्क और विज्ञान से दूर कर अंधविश्वास की तरफ धकेल रहे हैं? हम देश को किस दिशा में ले जा रहे हैं? हम किन लोगों को अपना प्रतिनिधि चुने रहे हैं? अगर आज बच्चों को सच्चाई की जगह भ्रामक मान्यताएँ विज्ञान के नाम पर पढ़ाई जाएँगी, तो आने वाला भविष्य अंधकारमय है। ये हमारे देश की प्रगति और विकास के रास्ते को पीछे धकेलने जैसा है।
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