शाम का वक्त, आम भारतीय घर में आध्यात्मिक चर्चा के लिए सबसे उत्तम समय। वैसे तो सुबह भी पूजा पाठ का कार्यक्रम होता है पर रोजमर्रा के काम, दफ़्तर, बाज़ार के कारण किसी के पास लम्बी आध्यात्मिक चर्चा को सुनने के लिए समय नही होता। तभी आध्यात्मिक चैनल से पूज्य बाबा जी का सुरीला भजन प्रसारित होता है –
राम नाम के साबुन से जो मन का मैल छुड़ाएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा
नर शरीर अनमोल रे प्राणी प्रभु कृपा से पाया है
झूठे जग प्रपंच में पड़कर क्यों प्रभु को बिसराया है
समय हाथ से निकल गया तो सिर धुन धुन पछताएगा
निर्मल मन के दर्पण में वह राम के दर्शन पाएगा…
राम नाम का Soap?
यह भजन सुनते ही मेरे मन में आध्यात्मिक जिज्ञासा की बाढ़ सी आ गई, आख़िर यह राम नाम का साबुन किस दुकान पर मिलेगा? इस साबुन के विज्ञापन से अब तक मैं कैसे वंचित रह गया? इस साबुन से कैसी झाग और खुशबू आती होगी? इसे दिन में कितनी बार लगाना होगा? क्या इसे धोने के लिए सामान्य जल से काम चल जायेगा या फिर किसी विशेष जल जैसे गंगा जल, गुलाब जल, अभिमंत्रित जल या देशी गाय के गोमूत्र जल की आवश्यकता होगी?
भजन नहीं Soap का विज्ञापन
जब इन्हीं जिज्ञासाओं को शान्त करने के लिए मैंने खोजबीन शुरू करी तो पता चला कि यह साबुन तो पूज्य बाबा जी के ही कारखाने में बनता है और जिसे मैं भजन समझ रहा था वह तो विज्ञापन निकला। पर कोई बात नहीं अगर साबुन कारगर हो तो किसी को क्या आपत्ति हो सकती है? यही बात जानने के लिए मैंने साबुन के नियमित उपभोक्ताओं से बात करी।
Soap की बिक्री से सेलिब्रिटी बने बाबा
बातचीत के दौरान मालूम चला कि मन की मैल का तो किसी को पता नहीं पर मनोकामनापूर्ति हेतु साबुन की बिक्री ख़ूब हो रही थी। साबुन की बिक्री इतनी बढ़ गई कि बाबा जी देखते ही देखते सेलिब्रिटी बन गए। बड़े बड़े नेता और उद्योगपति भी अब बाबा जी के साबुन का इस्तेमाल करने लगे। जिसके परिणाम स्वरूप साबुन अब और भी लोकप्रिय हो चला, उसकी चर्चा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर होने लगी। उसे खरीदने के लिए अब विदेशों से भी ग्राहक आने लगे।
स्वयं को निर्मल करने के लिए Soap नहीं बोध
तभी मुझे विज्ञापन की अगली पंक्ति याद हो आई कि नर शरीर अनमोल रे प्राणी.., और स्पष्ट हो गया कि यह भारत जैसे देश के लिए ही उपयुक्त बैठती है, जहां 25% से अधिक मौतें हृदयाघात से होती हो और मौत का दूसरा एवं तीसरा सबसे बड़ा कारण स्ट्रोक और वायु प्रदूषण हो, वहां पर साबुन के बगैर कैसे चलेगा? यह झूठा जग प्रपंच तो आपको ऐसे ही फंसाकर रखेगा लेकिन आपको ब्रह्ममुहुर्त में उठकर सबसे पहले साबुन द्वारा स्वयं को निर्मल करना है। उसके बाद आप दिनभर शरीर को नष्ट करने का कार्यक्रम जारी रख सकते हैं।
साथ ही विज्ञापन की आख़िरी पंक्ति से यह बात भी प्रकट हो जाती है कि यह ऑफर सीमित समय के लिए है, एक बार हाथ से निकल गया तो सिर धुन धुन पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा, अतः जल्द से जल्द साबुन का सेवन प्रारम्भ करे।
यह सब जानने के बावजूद भी मेरी जिज्ञासा अभी तक शान्त होने का नाम नही ले रही थी, इसलिए मैंने बाबा जी की कुल मार्केट वैल्यू का पता लगाना चाहा। जो आंकड़े मेरे सामने आए उसे देखकर किसी को भी हृदयाघात आ सकता है। लगभग 50,000 करोड़ से ज़्यादा की मार्केट वैल्यू रखने वाले बाबा जी का बिजनेस मॉडल केवल साबुन ही नहीं बेचता, उसमें अन्य उत्पाद भी शामिल हैं, जैसे –
• आध्यात्मिक खाद्य सामग्री
• पवित्र गो-उत्पाद
• राम-बाण औषधियाँ
• योग शिविर और “कर्मा क्लीनिंग”
• फाइव स्टार आश्रम सेवा
• ऑनलाइन मोक्ष कोर्स
इन सभी उत्पादों में से जो एक बात गायब है, वह है आत्मज्ञान। असली चीज़ छोड़कर बाकी सब है बाबा जी के पास, हर्बल काढ़े से लेकर मुक्तिदायिनी मालिश तक।
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