Mahakumbh 2025। 29 जनवरी, रात करीब 2 बजे का समय, मौनी अमावस्या का शुभ अवसर और महाकुम्भ 2025 में अमृत स्नान के लिए एकत्रित हुए करोड़ों श्रद्धालु। फिर भगदड़ मच जाती है। अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार 30 लोगों की जान जा चुकी है जिनमें से 25 लोगों की ही पहचान हो पाई है और घायलों का ईलाज चल रहा है। मरने वालों में 4 कर्नाटक के हैं। वहीं असम और गुजरात के 1-1 श्रद्धालुओं की मौत हुई है।
सरकार ने भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों को 25-25 लाख रूपए देने का एलान किया है। हालांकि SSP राजेश द्विवेदी के अनुसार कोई भगदड़ हुई ही नहीं। सब चंगा सी।
संगम नोज़ पर अत्यधिक भीड़ इकट्ठा होने को इस हादसे का कारण बताया जा रहा है। लोग अधिक इकट्ठा हो गए और बाहर जाने का रास्ता मिला नहीं। इस स्थिति में भगदड़ मच गई। VVip pass बंद कर दिया गया है। यानि अब 30 मौतों की कीमत पर हमने समानता का अधिकार समझ लिया है। मेले के क्षेत्र को No vehicle zone घोषित कर दिया गया है। यानि अब गाड़ियों के प्रवेश पर वर्जना है। रास्ते one way कर दिए गए हैं। जिले के बाहर से आने वाले वाहनों को प्रयागराज की सीमा पर रोक दिया जाएगा।
दो बड़े अधिकारियों को भेजा गया है जो महाकुंभ मेले की कमान सम्भालेंगे। उनमें से एक IAS आशीष गोयल हैं और दूसरे भानू गोस्वामी हैं।
खैर, जो होना था वो हो गया। पहले तो साधुओं के टेंट में आग लग गई और बची हुई कसर इस भगदड़ ने पूरी कर दी 30 लोगों की जान लेकर। प्रश्न उठने चाहिए। जब आपने संगम को एक अलग जिला घोषित कर दिया, 7,000 करोड़ से अधिक रूपए इस महोत्सव के लिए आवंटित किए, नए जिले के लिए बकायदा अफसरों की posting हुई उसके बाद ऐसी घटना हुई है। तो प्रश्न उठने चाहिए।
इस पूरे मुद्दे पर आपकी क्या राय है? असली चूक कहां हुई? कैसे हम इन जानों को बचा सकते थे? और भविष्य के लिए क्या सीख ले सकते हैं? कमेंट करके अवश्य बताएं।
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