21 जून यानि कि Yoga Day, पर योग क्या है? यह सवाल पूछे बिना पूरा देश योग दिवस के नाम पर एक से एक करतब दिखाने में लगा हुआ है। किसी ने बैठकर आंख बन्द कर ली, किसी ने शरीर को बड़े कुशलता से मोड़कर रखा, किसी ने फेफड़ों में हवा का आवागमन नियंत्रित कर लिया, किसी ने नाड़े को कसकर ब्रह्मचर्य साधा और किसी ने मूलाधार में बैठे सर्प को जाग्रत किया।
2025 का योग दिवस कुछ ख़ास
खैर यह Yoga Day मनाने की परम्परा 21 जून 2015 से शुरू हुई, पर अबतक योग के नाम पर इसी तरह की क्रियाओं, मान्यताओं को बल मिलता आया है। लेकिन 2025 के इस योग दिवस पर कुछ ख़ास, कुछ अलग ही नज़ारा देखने को मिला।
ठीक वहीं पर जब विश्वभर में यह सर्कस चल रहा था, तब हजारों लोग देश भर के अलग अलग शहरों के सिनेमा घरों में जाकर योग का वास्तविक अर्थ समझने की कोशिश कर रहे थे। यह बात सुनने में जितनी अटपटी लग रही है, वास्तविकता में उतनी ही आश्चर्यचकित करने वाली भी है।
जब लोग सुबह सुबह योगा मैट लेकर भाग रहे थे, तब वहीं पर कुछ लोग योग को श्रीमद्भगवद्गीता द्वारा गहराई से समझने के लिए सिनेमा घरों में गए। इस अद्भुत घटना को अंजाम देने का श्रेय आचार्य प्रशान्त और उनकी संस्था प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन को जाता है।

आचार्य प्रशान्त ने लोगों को श्रीमद्भगवद्गीता के अलग अलग श्लोकों के माध्यम से योग का सही अर्थ समझाया, साथ ही इस दौरान समता, पाप पुण्य, कूटस्थ, आत्मस्थ, योगारूढ़, समाधि जैसे कई शब्दों पर भी चर्चा करी।
International Yoga Day परआचार्य प्रशान्त ने कहा:
- योग है, आपको असुरक्षा से बाहर निकालने के लिए।
- कुछ करने को योग नहीं कहते, कुछ होने को भी योग नहीं कहते; जो बने (अहंकार) बैठे हो, उसके मिटने को योग कहते हैं।
- दुःख के संयोग से वियोग को योग कहते हैं।
- सही केंद्र से संचालित बुद्धि — समबुद्धि।
- अहंकार जितना घना होता है, बुद्धि उतनी ही विक्षिप्त हो जाती है।
- गुरु का कार्य आपके झूठ को काटना होता है।
- ज्ञान और योग एक ही बात हैं।
- बिना ज्ञान के योग को अंधयोग कह सकते हो।
🕉 2.48
श्लोक:
योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय ।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥
हे धनंजय!
दृढ़ रूप से योग में स्थित होकर आसक्ति का त्याग करके
सिद्धि और असिद्धि में सम रहते हुए कर्म करो।
इसी प्रकार से समता को योग कहते हैं।
🕉 6.1
श्लोक:
अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः ।
स संन्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः ॥
जो कर्म के फल से अनाश्रित होकर निष्काम कर्म करते हैं,
वे संन्यासी और योगी है, और वे न अग्नि का त्याग करते हैं, और न ही अक्रिय हो जाते हैं।
खुद को और बेहतर जानना है योग
इंदौर के INOX PVR में मौजूद अविनाशी ने बताया कि योग दिवस पर इस तरह PVR में आचार्य प्रशांत से सीखने का मौका मिलेगा ये उन्होंने कभी नहीं सोचा था और वो बहुत खुश हैं। इससे पहले वह योग को केवल शारीरिक व्यायाम तक ही सीमित समझती थीं लेकिन अब उनके लिए योग का अर्थ है खुद को और बेहतर जानना।
बुक स्टॉल्स से किताबों के प्रति प्रेम का संदेश

इसके अलावा आचार्य प्रशांत के गीता छात्रों ने देश के अलग-अलग शहरों में बुक स्टॉल लगाकर योग दिवस के दिन लोगों को किताबें पढ़ने के प्रति जागरूक किया। इनमें आचार्य प्रशांत द्वारा लिखित न केवल जीवन संबंधी मुद्दों पर किताबें उपलब्ध थीं बल्कि गीता एवं उपनिषदों पर भी ढेरों पुस्तकें थीं।
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