महाभारत का युद्ध और झूठ
साधो, इस देश में कुछ भी समझाने के लिए अतीत से शुरू करना पड़ता है क्योंकि इस देश को पुराने की आदत लगी हुई है। यहां बात करने से पहले बताना पड़ता है कि बात कितनी पुरानी है, तब जाकर उस बात में कुछ वज़न आ पाता है। तो यह बात लगभग 5000 साल पुरानी है जब महाभारत का युद्ध चल रहा था। द्रोणाचार्य पाण्डवों की सेना पर भारी पड़ रहे थे। तभी उन्हें हराने के लिए एक युक्ति निकाली गई, युधिष्ठिर द्वारा एक अफ़वाह को जानबूझकर फैलाया गया।
युधिष्ठिर ने कहा:
“अश्वत्थामा हतः इति, नरो वा कुंजरो वा”
(अश्वत्थामा मारा गया, मनुष्य या हाथी – पता नहीं)
लेकिन यह कहा गया इस तरह कि “नरो वा कुंजरो वा” शंखध्वनि में दब गया, और द्रोण ने मान लिया कि उनका पुत्र मर गया है। वे शोक में शस्त्र त्याग कर बैठ गए, और उसी समय धृष्टद्युम्न ने उन्हें मार डाला। इस तरह युधिष्ठिर द्वारा फैलाई गई अफ़वाह द्रोणाचार्य को मारने में सफ़ल रही।
तब से लेकर अब तक इस देश में अनगिनत झूठ फैलाए जा चुके हैं और प्रतिदिन फैलाए जा रहे हैं। झूठ फैलाना तो अब एक पेशा भी बन चुका है। झूठ फैलाने में प्रशिक्षित लोग दिन रात नागरिकों की परवाह किए बिना राष्ट्रीय चैनलों और अखबारों से झूठ फैलाते हैं।
सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम – मृत्यु के आंकड़े
झूठ जानलेवा होता है, यह बात तो महाभारत में साफ़ दिख जाती है पर असल जिन्दगी में इस बात को छुपाने के लिए और झूठ फैलाया जाता है। इसका एक ताज़ा उदाहरण कोविड से जुड़ा हुआ है:
जहां 2020- 21 में कोविड संक्रमण को लेकर तरह तरह के झूठ फैलाए जा रहे थे, जैसे कि “टीका लगवाने से बांझपन होगा” या “गौमूत्र से कोरोना ठीक होता है”; वहीं पर सरकार बता रही थी कि कोविड से कुल 5.3 लाख लोगों की मृत्यु हुई है। जबकि 7 मई 2025 को सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर आधारित रिपोर्ट से पता चलता है कि 2020 की तुलना में 2021 में कुल 21 लाख अधिक मृत्यु को देश भर में दर्ज किया गया है जो कि कोविड के आंकड़े से चार गुना अधिक है। रिपोर्ट को जारी करने में चार साल की देरी भी आंकड़े को छुपाने की और सरकार के छवि को चमकाने के प्रयास की ओर संकेत करती है।
झूठ का मायाजाल
खैर यही एक मात्र झूठ नही था जो कोविड के दौरान फैलाया गया, विपत्ति के दौर में ऐसे कई झूठ फैलाए गए या तथ्यों को छुपाया गया, जैसे:
- DRDO द्वारा विकसित 2-DG(2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज) दवा को कोविड-19 के इलाज के लिए आपातकालीन उपयोग की मंजूरी दी गई, और इसे WHO द्वारा अनुमोदित बताया गया। हालांकि, WHO ने स्पष्ट किया कि उसने इस दवा की प्रभावशीलता की समीक्षा या प्रमाणन नहीं किया है।
- पतंजलि आयुर्वेद ने दावा किया कि उसकी कोरोनिल दवा को WHO और आयुष मंत्रालय से मंजूरी मिली है। हालांकि, WHO ने स्पष्ट किया कि उसने किसी भी पारंपरिक दवा को कोविड-19 के इलाज के रूप में प्रमाणित नहीं किया है।
- अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर कई सारे तथ्य छुपाए गए, जिनमें ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों को प्रमुख रूप से छिपाया गया।
- स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी दबाव के कारण कुछ लोगों को बिना टीका लगाए ही “डबल वैक्सीनेटेड” के रूप में पंजीकृत किया गया, ताकि टीकाकरण लक्ष्य पूरे किए जा सके।
… आख़िर हम कब तथ्यों को गंभीरता से लेना शुरू करेंगे?
झूठ फैलाने के कारण या तथ्यों के साथ हेर फेर के कारण केवल कोविड ही में नहीं बल्कि अतीत में कई ऐसे घटना क्रम रह चुके हैं जिनमें कई निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवाकर इसका मूल्य चुकाना पड़ा है। आख़िर हम कब अपनी गलतियों से सीखेंगे? आज इन्हीं अफवाहों और झूठ के चलते पृथ्वी छठे मास एक्टिंक्शन के कगार पर खड़ी है। इन्हीं अफवाहों ने अनेकों निर्दोष प्रजातियों को सदा के लिए विलुप्त कर दिया और प्रतिदिन करता जा रहा है… आख़िर हम कब तथ्यों को गंभीरता से लेना शुरू करेंगे?