Winter Session of Parliament: संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त हो चुका है। मारपीट, तोड़फोड़ जो मचना था सब हो गया। किसी का सर फूटा, किसी का घूटना टूटा। दोनों ओर से FIR हुई। हांलांकि और भी कारण हैं जिनकी वजह से ये शीतकालीन सत्र चर्चा में है। जैसे कि निकम्मापन। 52% functionality रही लोकसभा की। और राज्यसभा की functionality मात्र 39% रही। Functionality का मतलब ऐसे समझिए कि आपको 100 घंटे उपलब्ध हैं काम करने के लिए और उनमें से आप 52 घंटे ही इस्तेमाल कर पाए। बाकी का समय आपने अपनी नौटंकी करने में गंवा दिया। ऐसा नहीं है कि आपके पास काम नहीं था।
लेकिन आपको अपनी मौजूदगी भी तो दर्ज़ करानी थी और वो केवल काम करके तो नहीं होगी। कुछ अतिरिक्त करके दिखाना होगा। तो बयानबाजी, धरने और मारपीट का रास्ता काम करने के रास्ते से अधिक उपयुक्त समझा गया। एक खास बात और रही। अबकी बार नेहरू जी नहीं अम्बेडकर जी जीवंत हो आए संसद में। खैर आगे बढ़ते हैं। और भी कारनामें हैं बताने को।
सत्र खत्म होते-होते 33 bills pending हैं संसद में। मुझे लगता है संसद judiciary से सीख नहीं ले पा रही। जहां pending cases की संख्या करोड़ों में जाती है। कितनों का न्याय तो अब चंद्रगुप्त ही कर रहे हैं। Question Hour की बात करें। तो राज्य सभा में 19 में से 15 दिनों तक question hour हुआ ही नहीं। वहीं लोकसभा में question hour 20 दिनों में से 12 दिनों तक तो 10 मिनट से अधिक नहीं हुआ। तो ये रही विशेषता हमारी फल फूल रही democracy की। सवाल ही नहीं पूछे जा रहे हमारे मंत्रियों से।
कुछ bills भी पास हुए। लेकिन दो bills विशेष रहे और चर्चा भी खूब हुई। One nation One election से सम्बंधित दो bills introduce हुए संसद में। इन दोनों bills को joint parliamentary committee के पास भेज दिया गया है और ये अपनी report submit करेंगी अगले सत्र के आखिरी हफ्ते के पहले दिन।
मारपीट और घमासान से इतर एक विशेष अवसर भी लेकर आया ये शीतकालीन सत्र। संविधान को लागू किए 75 साल होने की उपलब्धि मनाई गई। लोकसभा में संविधान पर लगभग 16 घंटे चर्चा चली। वहीं राज्यसभा में करीब 18 घंटे संविधान पर बातचीत हुई। ये निर्णय हुआ कि एक साल लम्बा उत्सव मनाया जाएगा। चार Themes भी निर्धारित किए गए जो अधार बनेंगे इस साल भर चलने वाले उत्सव का।
- पहला थीम है – Preamble
- दूसरी थीम है – Know your constitution / अपने संविधान को जानिए
- तीसरा थीम है – Making of the constitution / संविधान कैसे बना
- और चौथा थीम है – celebrating it’s glory / संविधान की महानता का उत्सव
अवश्यकता भी है इन themes की। हममें से शायद कुछ ही लोग हों जिन्हें संविधान के बारे में कुछ सतही बातें भी पता होंगी। Preamble क्या है? Constitution और Preamble किन मूल्यों एवं उद्देश्यों के प्रति हमें प्रेरित करते हैं। अगर हमें ये बातें नहीं पता हैं तो शायद हमें हमारे भारतीय होने पर प्रश्नचिन्ह खड़े करने चाहिए।
President of India श्रीमती द्रोपदी मुर्मू जी ने संविधान के 75 वर्षों के उत्सव पर दो किताबों का विमोचन भी किया। इन दो किताबों के नाम है:
Making of the constitution of India and it’s glorious journey Making of the constitution of India: A Glimpse हाल ही में social media पर एक reel देखी मैंने जिसमें एक व्यक्ति हम 26 january क्यों celebrate करते हैं के जवाब में कह रहा था कि जाड़े खत्म होने की खुशी में हम 26 जनवरी को उत्सव मनाते हैं।
आपमें से भी कई लोगों को confusion होगा कि 26 जनवरी को हम Republic Day celebrate तो करते हैं लेकिन इस दिन हुआ क्या था और republic का मतलब क्या है? 26 जनवरी तो एक बला थी। अब ये 26 नवम्बर को क्या हुआ था। मामला पेंचिदा है।
आइए बताता हूं 26 जनवरी और 26 नवम्बर की हम भारतीयों के लिए विशेषता। Republic का अर्थ होता है गणतंत्र। अब ये गणतंत्र क्या होता है। तो गणतंत्र या republic माने अब राज्य या देश का सर्वोच्च पदासीन व्यक्ति जनता द्वारा चुना हुआ होगा। यानि राजशाही नहीं चलेगी। राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा। भारत में वो सर्वोच्च पद राष्ट्रपति का है। हालांकि राष्ट्रपति सीधे तौर पर जनता द्वारा नहीं चुने जाते हैं लेकिन जानता का नेतृत्व करने वाले लोग चुनते हैं – सांसद और विधायक।
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान के अपनाए जाने और देश के गणराज्य बनने की प्रक्रिया को याद करने के लिए मनाया जाता है, जो 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ था। भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू होने पर Indian Independence Act 1947 और Government of India Act 1935 निरस्त हो गया। भारत ब्रिटिश क्राउन का डोमिनियन नहीं रहा और एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बन गया, जिसके पास अपना संविधान है।
कुल मिलाकर 15 अगस्त 1947 को हम आज़ाद तो हो गए थे लेकिन हम अभी भी उन कानूनों का पालन कर रहे थे जो Britishers ने बनाए थे। और हम अभी भी उनके ही संरक्षण में थे जिसके लिए dominion शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। 26 जनवरी को हमने बता दिया कि अब हमारी ज़िम्मेदारी हम स्वयं लेते हैं। हमारा संविधान लागू हो गया।
अब इन सब के बीच में 26 नवम्बर 1949 की क्या विशेषता है?
संविधान बनाने का जिम्मा था संविधान सभा के पास, अंग्रेजी में कहें तो Constituent Assembly of India। डॉ राजेन्द्र प्रसाद इसके चेयरपर्सन थे। और डॉ अम्बेडकर drafting committee के चेयरपर्सन थे। पाकिस्तान के विभाजन के बाद संविधान सभा में कुल 299 सदस्य थे। 2 साल 11 महीने और 17 दिन की मेहनत के बाद 26 नवम्बर 1949 वो दिन था जब संविधान सभा ने कहा कि ये वो संविधान है जिसे हम लागू करेंगे।
अब प्रश्न ये आता है कि जब 26 नवम्बर को संविधान सभा ने संविधान का अंतिम स्वरूप स्वीकार कर लिया था तो इसे लागू करने के लिए 26
जनवरी यानी 2 महीने बाद का दिन क्यों चूना गया?
ये जानने के लिए हमें जाना होगा दिसम्बर 1929 में। पूर्ण स्वराज लाहौर सत्र में दिसंबर 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने ऐतिहासिक “पूर्ण स्वराज” प्रस्ताव पारित किया, जिसमें ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की गई थी। स्वतंत्रता की घोषणा 26 जनवरी 1930 को औपचारिक रूप से की गई, और कांग्रेस ने भारतीयों से इस दिन “स्वतंत्रता” का उत्सव मनाने का आह्वान किया। 1930 से 1947 तक, 26 जनवरी को “स्वतंत्रता दिवस” या “पूर्ण स्वराज दिवस” के रूप में मनाया जाता था।
हालांकि भारत को आज़ादी मिली 15 अगस्त 1947 को जिसके कारण 26 जनवरी के महत्व का पूनर्मूल्यांकन करना पड़ा।
और इसलिए 26 जनवरी 1947 का चयन किया गया संविधान को लागू करने और गणतंत्र दिवस के रूप में इस दिन को याद करने के लिए ताकि इस दिन के ऐतिहासिक विरासत को भी सम्मानित किया जा सके।
उम्मीद है आप सभी को 15 अगस्त, 26 नवम्बर और 26 जनवरी के महत्व को समझा पाया हूं। हम सभी भारतवासियों को संविधान के 75 वर्षों के पूरे होने की बधाई। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने की बधाई। उम्मीद है कि हमारे सांसद भी इस बात को समझेंगे और संसद के समय का मूल्य करेंगे। लेकिन नेता तभी समझदार हो सकता है जब जनता समझदार हो। और जनता समझदार हो इसके लिए संविधान के मूल्यों को जानने और समझने की आवश्यकता है। और वो समझ विकसित करने का अवसर लेकर आया है संविधान का 75वां जन्मोत्सव।
पढ़ते रहिए, बढ़ते रहिए। धन्यवाद।
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